ब्ल्यू बैल्स स्कूल, नारायणगढ़ में बसंत पंचमी पर यज्ञ-हवन का भव्य आयोजन
विद्या, संस्कार और सफलता का संगम
23 जनवरी । नारायणगढ़ । बसंत पंचमी के पावन अवसर पर ब्ल्यू बैल्स स्कूल, नारायणगढ़ में विद्या की देवी मां सरस्वती के पूजन-अर्चन एवं यज्ञ-हवन का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक वातावरण में विद्यालय की मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य, प्रधानाचार्य श्री राजीव मेहता, उप-प्रधानाचार्य श्री गुलशन मेहता, समस्त शिक्षकगण तथा कक्षा दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने मां सरस्वती से विद्या, विवेक और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद प्राप्त किया।

शिक्षा के साथ संस्कारों का संदेश
इस अवसर पर प्रधानाचार्य श्री राजीव मेहता ने कहा कि बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शिक्षा और संस्कारों को जीवन में आत्मसात करने का प्रतीक है। आज की शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक अर्जित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। उन्होंने कहा,
“आज का विद्यार्थी ही कल का राष्ट्र निर्माता है। यदि शिक्षा के साथ नैतिक मूल्य जुड़ जाएं, तो समाज और देश दोनों सशक्त बनते हैं।”

आने वाली परीक्षाओं के लिए प्रेरणा
उप-प्रधानाचार्य श्री गुलशन मेहता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि फरवरी-मार्च में आने वाली बोर्ड परीक्षाएं उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बनाए रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “परीक्षा किसी डर का कारण नहीं, बल्कि अपनी क्षमता को सिद्ध करने का अवसर है। मेहनत, अनुशासन और धैर्य से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।”
उज्ज्वल करियर की दिशा
दोनों शिक्षाविदों ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि आज की मेहनत ही कल के करियर की नींव है। तकनीक, विज्ञान, कला, खेल या किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन आवश्यक है। विद्यालय परिवार सदैव विद्यार्थियों के साथ खड़ा है और उनके सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आस्था और आत्मबल का संचार
यज्ञ-हवन के दौरान मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा। विद्यार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास और उम्मीद की झलक साफ दिखाई दी। प्रधानाचार्य श्री राजीव मेहता ने बताया कि विद्यालय द्वारा हर वर्ष बसंत पंचमी के अवसर पर बोर्ड परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की सफलता के लिए यह आयोजन किया जाता है, ताकि मां शारदा का आशीर्वाद बच्चों, विद्यालय और समस्त स्टाफ पर सदैव बना रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि विद्यार्थियों के मन में नई ऊर्जा, संकल्प और सफलता की प्रेरणा भी भर गया।