डिजिटल इंडिया के दौर में काला आम आरटीओ चेक पोस्ट बना परेशानी का केंद्र ऑनलाइन टैक्स सुविधा न होने से टूरिस्ट और वाहन चालक बेहाल
📝 नवीन/गौरव (17 जनवरी)
काला आम आरटीओ चेक पोस्ट पर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से टैक्स वसूली की प्रक्रिया आज भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने के कारण टूरिस्ट और वाहन चालक भारी परेशानी झेलने को मजबूर हैं। डिजिटल भुगतान के युग में नकद लेन-देन की मजबूरी न सिर्फ समय बर्बाद कर रही है, बल्कि हिमाचल जैसे पर्यटन प्रदेश की छवि पर भी सवाल खड़े कर रही है।
चेक पोस्ट पर रोजाना सैकड़ों गाड़ियां प्रवेश करती हैं। टैक्स जमा करने के लिए न तो स्वैपिंग मशीन उपलब्ध है और न ही यूपीआई या क्यूआर कोड की व्यवस्था।कई बार चालकों के पास नकद न होने से विवाद की स्थिति तक बन जाती है।
पर्यटक खासतौर पर इस व्यवस्था से खिन्न नजर आते हैं। उनका कहना है कि जब होटल, ढाबे और छोटे दुकानदार तक डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं, तो सरकारी चेक पोस्ट पर यह सुविधा क्यों नहीं? वहीं ट्रक, टैक्सी और निजी वाहन चालक बताते हैं कि भुगतान में देरी से उनका पूरा शेड्यूल बिगड़ जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने परिवहन विभाग से मांग की है कि काला आम आरटीओ चेक पोस्ट पर तत्काल स्वैपिंग मशीन, यूपीआई और क्यूआर कोड आधारित टैक्स भुगतान प्रणाली लागू की जाए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी और राज्य में प्रवेश करने वाले पर्यटकों को सकारात्मक संदेश जाएगा।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन डिजिटल इंडिया की सोच को धरातल पर उतार पाएगा या काला आम आरटीओ चेक पोस्ट यूं ही यात्रियों की परेशानी का कारण बना रहेगा।
गौर हो की कालाआम में विभाग द्वारा लगाए गए कमरों से सबसे अधिक चालान किये गए जिससे सरकार ने हिमाचल में सबसे अधिक धन का संग्रहण किया