नारायणगढ़ (वालिया) | 9 जनवरी 2025
काला आम्ब में मजदूर लखनपाल की निर्मम हत्या के मामले को लेकर मजदूर संगठनों और स्थानीय जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) जिला सिरमौर (हिमाचल) और जिला अंबाला (हरियाणा) के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने सुभाष चौक से थाना नारायणगढ़ तक जोरदार प्रदर्शन किया।

ऐट्रोसिटी एक्ट में केस दर्ज करने की मांग
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि 2 जनवरी को काला आम्ब स्थित फैक्ट्री मालिकों द्वारा मजदूरों पर की गई बर्बर मारपीट में मारे गए लखनपाल के सभी दोषियों पर ऐट्रोसिटी एक्ट के तहत साजिशन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। प्रदर्शनकारियों और मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि पीड़ितों की जाति पूछ-पूछकर पिटाई की गई, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर कमजोर धाराओं में मामला दर्ज कर दिया।
मजदूरों और परिजनों में भारी आक्रोश
इस कथित लापरवाही से मृतक के परिजनों के साथ-साथ काला आम्ब और आसपास की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों में भारी रोष है। प्रदर्शन में मृतक के पिता रोशन लाल, मासी संतोष चौहान, घायल मजदूर नीरज की माता कांता देवी सहित ददाहू क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए। उल्लेखनीय रूप से प्रदर्शन में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही।

थाना प्रभारी का आश्वासन
थाना प्रबंधक ललित कुमार ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि एक घंटे के भीतर ऐट्रोसिटी एक्ट जोड़कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि परिजन जो भी तथ्य लिखित में देंगे, उन्हें जांच में शामिल किया जाएगा। मौके पर ही परिजनों ने लिखित बयान पुलिस को सौंप दिया।
एसडीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
इसके बाद आक्रोशित जनता ने एसडीएम महोदया के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोपियों पर सख्त धाराएं लगाने के साथ-साथ मृतक के परिजनों और घायलों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की गई।
वामपंथी व किसान संगठनों का समर्थन
प्रदर्शन का नेतृत्व सीटू सिरमौर से आशीष कुमार और अंबाला से रमेश नन्हेंड़ा ने किया। इस मौके पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) सिरमौर के जिला सचिव का. राजेंद्र ठाकुर, सीपीआई(एम) अंबाला के का. सतीश सेठी, किसान सभा से सतपाल मान और टेक चंद, ददाहू ग्राम पंचायत के प्रधान पंकज गर्ग, सीटू अंबाला से शीतल राम, सतपाल चौहान, बाबू राम सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
निष्कर्ष
वक्ताओं ने साफ चेतावनी दी कि यदि लखनपाल हत्याकांड में ऐट्रोसिटी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई नहीं हुई और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह मामला अब केवल एक हत्या नहीं, बल्कि मजदूरों की सुरक्षा, सामाजिक न्याय और कानून के समान प्रयोग की परीक्षा बन चुका है।