अंबाला में सड़क सुरक्षा : नियमों से ही बचेगा जीवन
गौरव-नवीन 17 जनवरी | सड़क केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि जीवन की डोर भी है। अंबाला जिले में वर्ष 2025 के दौरान सड़क हादसों में 271 लोगों की मृत्यु होना इस सच्चाई को और अधिक कठोर रूप में सामने लाता है। इनमें 70 प्रतिशत दोपहिया वाहन चालक और 65 प्रतिशत बिना हेलमेट के थे। यह आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि हर संख्या के पीछे एक परिवार का उजड़ना, एक घर का सूना हो जाना और समाज की सामूहिक विफलता छिपी है। यह समय आत्ममंथन का है—प्रशासन, पुलिस और आम नागरिक, सभी के लिए।
मानव जीवन की सुरक्षा संविधान का मूल भाव है। सड़क पर चलने वाला हर व्यक्ति—चाहे वह पैदल हो, साइकिल सवार हो या वाहन चालक—सुरक्षित लौटने का अधिकार रखता है। लेकिन अधिकार के साथ कर्तव्य भी जुड़ा है। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना, गति सीमा का पालन करना, शराब पीकर वाहन न चलाना और मोबाइल से दूरी बनाकर ड्राइविंग करना केवल नियम नहीं, बल्कि जीवन रक्षक कवच हैं। इन नियमों का पालन न करना स्वयं के साथ-साथ दूसरों के जीवन को भी खतरे में डालना है।
अंबाला प्रशासन ने सड़क सुरक्षा को लेकर बैठकें, निरीक्षण और निर्देश जारी किए हैं। यह सराहनीय पहल है, परंतु अब आवश्यकता है कि ये निर्देश जमीन पर सख्ती और निरंतरता के साथ लागू हों। ट्रैफिक पुलिस की भूमिका यहां निर्णायक हो जाती है। केवल चालान काटना ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि व्यवहार में बदलाव लाना असली लक्ष्य होना चाहिए। ट्रैफिक पुलिस को स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने चाहिए, ताकि लोग डर से नहीं, समझ से नियमों का पालन करें।
रेड लाइट पर निरीक्षण और अनुशासन अत्यंत आवश्यक है। अंबाला के कई चौराहों पर देखा जाता है कि लोग सिग्नल का सम्मान नहीं करते। रेड लाइट पर आगे बढ़ जाना, जेब्रा क्रॉसिंग पर वाहन खड़ा कर देना, गलत दिशा में चलना—ये सब छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़े हादसों का कारण बनती हैं। हर प्रमुख चौराहे पर ट्रैफिक कर्मियों की नियमित तैनाती, सिग्नल जंप करने वालों पर त्वरित कार्रवाई और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना समय की मांग है।
आज के युग में तकनीक प्रशासन की बड़ी सहयोगी बन सकती है। सड़क पर सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क न केवल अपराध नियंत्रण में सहायक है, बल्कि ट्रैफिक अनुशासन के लिए भी प्रभावी साधन है। स्पीड कैमरा, रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन सिस्टम और ऑटोमेटिक चालान व्यवस्था लागू होने से नियम तोड़ने वालों पर निष्पक्ष और निरंतर कार्रवाई संभव है। इससे पुलिस पर निर्भरता कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। अंबाला प्रशासन को चाहिए कि राष्ट्रीय राजमार्गों, प्रमुख बाजारों, स्कूल क्षेत्रों और दुर्घटना संभावित स्थानों पर आधुनिक सीसीटीवी सिस्टम को प्राथमिकता से स्थापित करे।
साथ ही, सड़कों की संरचना भी जीवन सुरक्षा से जुड़ी है। टूटे रास्ते, अंधे मोड़, बिना संकेतक पुलिया, अपर्याप्त स्ट्रीट लाइट—ये सभी दुर्घटनाओं को आमंत्रण देते हैं। प्रशासन, एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी के बीच बेहतर समन्वय से ब्लैक स्पॉट की पहचान कर त्वरित सुधार किया जाना चाहिए। रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड, स्पीड ब्रेकर, स्ट्रीट लाइट और जेब्रा क्रॉसिंग जैसे साधारण उपाय भी कई जानें बचा सकते हैं।
अंततः, सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन या पुलिस का विषय नहीं है; यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। हर नागरिक यदि यह समझ ले कि नियमों का पालन किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने और दूसरों के जीवन की रक्षा के लिए है, तो तस्वीर बदल सकती है। अंबाला को एक सुरक्षित शहर बनाने के लिए प्रशासन की दृढ़ता, ट्रैफिक पुलिस की सक्रियता और नागरिकों की जागरूकता—तीनों का संगम आवश्यक है।
जब एक हेलमेट किसी पिता को बच्चों के पास सुरक्षित लौटा लाए, एक रेड लाइट किसी मां की जिंदगी बचा ले और एक सीसीटीवी किसी लापरवाह चालक को समय पर रोक दे—तब समझिए कि व्यवस्था ने अपना धर्म निभाया। सड़क पर अनुशासन ही जीवन की गारंटी है, और यही अंबाला प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी और समाज की सबसे बड़ी जरूरत है।